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गुस्ताख़ी-ए-विसाल है मश्शाता-ए-नियाज़
या'नी दुआ ब-जुज़ ख़म-ए-ज़ुल्फ़-ए-दुता न माँग

Union's boldness adorns humility's plea with grace,So ask in prayer for naught but her twin-curled tresses' embrace.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मिलन की गुस्ताख़ी नम्रता की शृंगारक है। यानी, प्रार्थना में दोहरी जुल्फ़ों के घुमाव के सिवा कुछ और न माँगो।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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