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बरहम है बज़्म-ए-ग़ुंचा ब-यक-जुंबिश-ए-नशात
काशाना बस-कि तंग है ग़ाफ़िल हवा न माँग

By one joyous stir, the bud's assembly is undone,Your dwelling's so confined, heedless one, for air ask none.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

एक खुशी की हलचल से कलियों की सभा बिखर जाती है। तुम्हारा घर इतना तंग है कि ऐ लापरवाह, हवा भी मत मांगो।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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