जिसे नसीब हो रोज़-ए-सियाह मेरा सा
वो शख़्स दिन न कहे रात को तो क्यूँकर हो
“The one whose fate holds a dark day, as black as mine, How could that person not call the night 'day', and repine?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जिस व्यक्ति को मेरे जैसा काला दिन नसीब हो, वह भला रात को दिन क्यों न कहेगा?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
