हमारे ज़ेहन में उस फ़िक्र का है नाम विसाल
कि गर न हो तो कहाँ जाएँ हो तो क्यूँकर हो
“That thought, 'union', in our minds it's named;If it exists not, where could we then go?If it exists, then how could it be famed?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हमारे ज़ेहन में उस विचार का नाम 'विसाल' है। यदि वह न हो तो हम कहाँ जाएँ, और यदि वह हो तो कैसे संभव हो?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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