मै-ख़ाना-ए-जिगर में यहाँ ख़ाक भी नहीं
ख़म्याज़ा खींचे है बुत-ए-बे-दाद-फ़न हुनूज़
“In the heart's wine-house, not even dust remains here,Still the unjust-artful idol yawns with a languid air.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यहाँ हृदय रूपी मैख़ाने में अब धूल भी नहीं बची है। फिर भी, वह क्रूर और कलात्मक माशूक़ अभी भी अंगड़ाइयाँ ले रहा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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