मौज-ए-सराब-ए-दश्त-ए-वफ़ा का न पूछ हाल
हर ज़र्रा मिस्ल-ए-जौहर-ए-तेग़ आब-दार था
“Of loyalty's desert, ask not the mirage-wave's plight,Each particle shone like a keen blade, tempered and bright.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
वफ़ा के रेगिस्तान की मृगतृष्णा रूपी लहर का हाल न पूछो। उसका हर कण तेज़ धार वाली तलवार के जौहर की तरह चमकता था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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