ये ज़िद कि आज न आवे और आए बिन न रहे
क़ज़ा से शिकवा हमें किस क़दर है क्या कहिए
“Such stubbornness, that today you won't come, yet can't help but appear,How much we complain to fate, what can one say here?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यह कैसी ज़िद है कि आज नहीं आएगा, लेकिन आए बिना भी नहीं रह सकता। हमें तकदीर से कितनी शिकायत है, क्या बताएं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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