मैं हूँ और अफ़्सुर्दगी की आरज़ू 'ग़ालिब' कि दिल
देख कर तर्ज़-ए-तपाक-ए-अहल-ए-दुनिया जल गया
“I am, Ghalib, and for gloom, I now desire, For my heart, seeing the world's false warmth, was set afire.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ग़ालिब, मैं हूँ और अब उदासी की इच्छा करता हूँ, क्योंकि दुनिया वालों की बनावटी गर्मजोशी का तरीका देखकर मेरा दिल जल गया।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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