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वाँ वो ग़ुरूर-ए-इज्ज़-ओ-नाज़ याँ ये हिजाब-ए-पास-ए-वज़अ
राह में हम मिलें कहाँ बज़्म में वो बुलाए क्यूँ

There, that pride of humble coquetry, here, this veil of self-respect; Where can we meet on the road? Why would they invite me to their assembly?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

वहाँ उनमें विनम्रता और नज़ाकत का अभिमान है, और यहाँ मुझमें आत्म-सम्मान का परदा है। ऐसे में हम रास्ते में कहाँ मिल सकते हैं, और वे मुझे अपनी महफिल में क्यों बुलाएँगे?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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