शोरीदगी के हाथ से है सर वबाल-ए-दोश — मिर्ज़ा ग़ालिब

शोरीदगी के हाथ से है सर वबाल-ए-दोश सहरा में ऐ ख़ुदा कोई दीवार भी नहीं

“My head, from restlessness, a burden on my shoulder lies, In this desert, O God, no wall meets my eyes.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

शोरीदगी के कारण मेरा सिर कंधे पर बोझ बना हुआ है। हे ख़ुदा, इस रेगिस्तान में कोई दीवार भी नहीं है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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