नक़्श को उस के मुसव्विर पर भी क्या क्या नाज़ हैं
खींचता है जिस क़दर उतना ही खिंचता जाए है
“What airs the portrait shows its very artist, too!The more he strives to sketch, the further it withdraws.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
नक़्श को अपने मुसव्विर पर भी बहुत नाज़ हैं। मुसव्विर उसे जितना खींचता है, वह उतना ही खिंचता चला जाता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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