क्यूँ गर्दिश-ए-मुदाम से घबरा न जाए दिल
इंसान हूँ पियाला ओ साग़र नहीं हूँ मैं
“Why should the heart not tremble at fate's unending spin?I am human, not a cup or goblet, to hold all sorrow in.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
दिल लगातार मुश्किलों और उतार-चढ़ाव से क्यों न घबराए? मैं एक इंसान हूँ, कोई प्याला या शराब का पात्र नहीं हूँ।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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