शोख़ी-ए-इज़्हार को जुज़ वहशत-ए-मजनूँ 'असद'
बस-कि लैला-ए-सुख़न महमिल-नशीन-ए-राज़ है
“Asad, what is expression's boldness, save Majnun's wild despair?For Layla of my verse resides, a secret in her palanquin there.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
असद, अभिव्यक्ति की चंचलता मजनूं की दीवानगी के सिवा और क्या है? क्योंकि कविता की लैला रहस्यों के पालकी में बैठी है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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