सर-नाविश्त-ए-इज़्तिराब-अंजामी-ए-उल्फ़त न पूछ
नाल-ए-ख़ामा ख़ार-ख़ार-ए-ख़ातिर-ए-आगाज़ है
“Don't ask about love's fate, its restless, troubled close; The pen's lament, a constant thorn, where its first memory grows.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
इश्क़ की बेचैनी से भरे अंजाम वाली किस्मत के बारे में मत पूछो। कलम की आह (चीख) उसके आगाज़ की यादों में एक लगातार चुभने वाला कांटा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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