Sukhan AI
मिरे दिल में है 'ग़ालिब' शौक़-ए-वस्ल ओ शिकवा-ए-हिज्राँ
ख़ुदा वो दिन करे जो उस से मैं ये भी कहूँ वो भी

Ghalib, in my heart, I bear both yearning for union and parting's complaint;

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

ऐ ग़ालिब, मेरे दिल में मिलन की इच्छा और जुदाई की शिकायत दोनों हैं। खुदा वो दिन लाए जब मैं उससे ये दोनों बातें कह सकूँ।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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