हुजूम-ए-गिर्या का सामान कब किया मैं ने कि गिर पड़े न मिरे पाँव पर दर-ओ-दीवार

“When did I arrange for this deluge of tears,That doors and walls might not crumble at my feet?”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैंने आँसुओं के इतने बड़े सैलाब का इंतज़ाम कब किया, कि उसकी वजह से दरवाज़े और दीवारें भी मेरे पैरों पर गिर पड़ें?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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