लिखा करे कोई अहकाम-ए-ताला-ए-मौलूद किसे ख़बर है कि वाँ जुम्बिश-ए-क़लम क्या है

“Let them chart the decrees of the newborn's rising star; who knows how the Pen moves in that realm afar?”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

चाहे कोई नवजात शिशु की कुंडली और भाग्य के आदेश लिखता रहे, मगर किसे पता है कि वहाँ (ईश्वर के यहाँ) भाग्य लिखने वाली क़लम किस तरह चलती है।

विस्तार

ग़ालिब यहाँ इंसान की उस आदत पर हल्की सी मुस्कान बिखेरते हैं जहाँ वह आने वाले कल को नापने की कोशिश करता है। ज्योतिषी भले ही किसी नवजात की कुंडली बनाकर उसकी क़िस्मत तय करने के बड़े-बड़े दावे कर लें, लेकिन उस परवरदिगार की 'क़लम' किस तरह चलती है, यह भला कौन जान सका है? यह शेर हमें याद दिलाता है कि तक़दीर के असली फ़ैसले इंसानी समझ, गणित और अंदाज़ों से कहीं परे हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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