नफ़रत का गुमाँ गुज़रे है मैं रश्क से गुज़रा
क्यूँकर कहूँ लो नाम न उन का मिरे आगे
“Suspicion of hate crosses, yet I pass by with such envy,How can I bid you, 'speak not their name before me'?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ऐसा लगता है कि नफ़रत का गुमान हो रहा है, पर असल में मैं ईर्ष्या से गुज़र रहा हूँ। मैं तुमसे कैसे कहूँ, लो, मेरे सामने उनका नाम मत लो।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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