तकल्लुफ़ आइना-ए-दो-जहाँ मदारा है — मिर्ज़ा ग़ालिब

तकल्लुफ़ आइना-ए-दो-जहाँ मदारा है सुराग़-ए-यक-न-गह-ए-क़हर-आश्ना मा'लूम

“This mirror of two worlds, formality, is mere flattery's art,Yet of sudden, wrath-familiarity, a trace is known to start.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

औपचारिकता दोनों जहानों का ऐसा आइना है जो दिखावे या शिष्टाचार से भरा है। अचानक आने वाले, क्रोध से परिचित एक झलक का सुराग़ मालूम होता है।

विस्तार

तकल्लुफ़ आइना-ए-दो-जहाँ मदारा है सुराग़-ए-यक-न-गह-ए-क़हर-आश्ना मा'लूम takalluf ā'ina-e-do-jahān madārā hai surāgh-e-yak-na-gah-e-qahr-āshnā ma'lūm दोनो दुनिया की मेहमान-नवाज़ी सिर्फ दिखावे का एक आईना है। लेकिन असलियत का सुराग उस एक गुस्से वाली नज़र से मिल जाता है जो सच्चाई से वाकिफ हो। शब्द 'तकल्लुफ़' का मतलब है औपचारिकता या दिखावा, 'मदारा' का अर्थ है आतिथ्य या अच्छा व्यवहार, और 'क़हर-आश्ना' उसे कहते हैं जो क्रोध या कठोर सत्य को जानता हो। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ जीवन के दिखावे की बात कर रहे हैं। हम सब ने अपने ऊपर शिष्टाचार का एक पर्दा डाल रखा है। यह दुनिया एक ऐसी जगह है जहाँ हर कोई एक-दूसरे से बहुत अदब से मिलता है, लेकिन यह सब महज़ एक रस्म है। ग़ालिब कहते हैं कि यह पूरी दुनिया की चमक-धमक बस एक ऊपरी तह है। असली बात तो वह है जो किसी की आँखों में नज़र आ जाती है। जब कोई इंसान हकीकत की कड़वाहट को देख लेता है, तो उसके लिए यह सारी खुश-अख़लाक़ी बेमानी हो जाती है। एक सच्ची और गहरी नज़र काफी होती है इस जहान की असलियत को समझने के लिए। दिखावे के आईने में सब कुछ सुंदर दिखता है, पर सच तो उस एक तीखी नज़र में छुपा होता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी सजे-धजे मेले में सब खुश दिखें, पर एक दुखी बच्चे की नज़र पूरे मेले का खोखलापन बता दे। जैसे कहा जाता है कि चेहरा झूठ बोल सकता है, पर आँखें नहीं। दिखावे की इस दुनिया में सच सिर्फ एक बेबाक नज़र में ही मिलता है।

कठिन शब्द

तकल्लुफ़— formality, ceremony, affectation, pretense
मदारा— politeness, civility, showing respect (sometimes feigned), flattery
यक-न-गह— suddenly, all at once, instantaneously
क़हर— wrath, rage, divine anger, punishment
क़हर-आश्ना— acquainted with wrath, familiar with rage

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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