हूँ क़तरा-ज़न ब-वादी-ए-हसरत शबाना रोज़
जुज़ तार-ए-अश्क जादा-ए-मंज़िल नहीं रहा
“Day and night, I shed tears in longing's deep vale,No path to my haven remains, save tears' thin trail.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैं दिन-रात हसरत की वादी में आँसू बहा रहा हूँ। आँसुओं की धारा के सिवा मंजिल तक पहुँचने का कोई रास्ता नहीं बचा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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