“If for her lashes' love, I become a public shame,Each finger feels to me like an arrow's cruel aim.”
मैं उसकी पलकों की मोहब्बत में जो लोगों की उंगलियों का निशाना बना हूँ, तो मुझे हर उंगली तीर की तरह लगती है।
मिज़्गाँ की मोहब्बत में जो अंगुश्त-नुमा हूँ, लगती है मुझे तीर के मानिंद हर अंगुश्त। Mizgaan ki mohabbat mein jo angusht-numa hoon, Lagti hai mujhe teer ke manind har angusht. तुम्हारी पलकों की मोहब्बत में मैं इतना बदनाम हो गया हूँ कि लोग मुझ पर उँगलियाँ उठाते हैं। अब मुझे हर उठती हुई उँगली एक तीर की तरह लगती है। शब्द मिज़्गाँ का मतलब है पलकें और अंगुश्त-नुमा का अर्थ है वह जिसकी तरफ लोग उँगली उठाएँ। मानिंद का मतलब है की तरह और अंगुश्त का मतलब उँगली है। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ उस चुभन की बात कर रहे हैं जो दुनिया की बातों से होती है। जब आप किसी से प्यार करते हैं, तो अक्सर लोग आपकी तरफ उँगलियाँ उठाने लगते हैं। शायरी में पलकों को अक्सर तीर कहा जाता है। ग़ालिब कह रहे हैं कि मैं तो उन पलकों का दीवाना था, पर मेरी उस दीवानगी ने मुझे पूरी दुनिया के सामने एक निशाना बना दिया है। अब आलम यह है कि कोई साधारण सी उँगली भी जब मेरी तरफ उठती है, तो मुझे ऐसा लगता है जैसे कोई तीर आकर मेरे सीने में लगा हो। यह समाज की बेरुखी और तानों का दर्द है। यह कुछ वैसा ही है जैसे आप कोई नया काम शुरू करें और लोग आपका मज़ाक उड़ाने लगें। उनकी बातें आपको शब्दों की तरह नहीं, बल्कि काँटों की तरह चुभती हैं। जैसे किसी ने कहा है कि ज़ुबान का घाव सबसे गहरा होता है। जब दुनिया आपकी मोहब्बत पर उँगली उठाती है, तो हर इशारा एक तीर बन जाता है।
