“Wherever I tread, all fingers rise to point;The whole world has turned from me, yet still, that finger holds sway.”
मैं जिधर भी जाता हूँ, उधर सब की उंगली उठती है। दुनिया ने मुझसे मुँह फेर लिया है, फिर भी उंगली उठाती रहती है।
जाता हूँ जिधर सब की उठे है उधर अंगुश्त यक-दस्त जहाँ मुझ से फिरा है मगर अंगुश्त Jata hun jidhar sab ki uthe hai udhar angusht, yak-dast jahan mujh se phira hai magar angusht. मैं जहाँ भी जाता हूँ, सब लोग मेरी तरफ उँगली उठाते हैं। ऐसा लगता है जैसे पूरी दुनिया ने एक साथ मुझसे मुँह फेर लिया है, ठीक वैसे ही जैसे एक उँगली मुड़ जाती है। अंगुश्त का अर्थ है उँगली और यक-दस्त का मतलब है अचानक या एक साथ। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ उस अकेलेपन की बात कर रहे हैं जो अक्सर बहुत ज़्यादा चर्चा के साथ आता है। क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि आप कहीं से गुज़रें और लोग फुसफुसाने लगें? हर कोई आपको देख रहा है, आप पर उँगली उठा रहा है, लेकिन कोई आपके पास नहीं खड़ा है। ये कितनी अजीब स्थिति है। आप सबकी नज़रों के केंद्र में हैं क्योंकि सब आप पर उँगली उठा रहे हैं, लेकिन फिर भी आप बिलकुल अकेले हैं क्योंकि दुनिया ने आपसे मुँह मोड़ लिया है। लोग आपकी चर्चा तो करते हैं, पर आपकी तकलीफ में साथ नहीं देते। इसकी मिसाल ऐसी है जैसे कोई व्यक्ति किसी मुसीबत में हो और लोग दूर खड़े होकर बस इशारा करें और बातें बनाएं, पर मदद के लिए हाथ न बढ़ाएं। अक्सर जब दुनिया आप पर उँगली उठाती है, तो वो आपका साथ छोड़ चुकी होती है।
