“Alas, that destiny fed to teeth's maw, by fate's decree,Those fingers, worthy of a pearl string's purity.”
अफसोस कि भाग्य ने उन लोगों की उंगलियों को दांतों का निवाला बना दिया, जिनकी उंगलियां मोतियों का हार पहनने के योग्य थीं।
अफ़्सोस कि दंदाँ का किया रिज़्क़ फ़लक ने, जिन लोगों की थी दर-ख़ुर-ए-अक़्द-ए-गुहर अंगुश्त बहुत अफ़सोस की बात है कि किस्मत ने उन लोगों की उंगलियों को दांतों का खाना बना दिया जो मोती पिरोने के लायक थे। यहाँ दंदाँ का मतलब दांत है और रिज़्क़ का मतलब भोजन होता है, जबकि फ़लक का अर्थ आकाश या किस्मत है और अक़्द-ए-गुहर का मतलब मोतियों की माला पिरोना है। दोस्त, ग़ालिब यहाँ ज़िंदगी की एक गहरी चोट की बात कर रहे हैं। जब हम बहुत दुखी होते हैं या पछताते हैं, तो अक्सर अपनी उंगलियां दांतों से दबा लेते हैं। ग़ालिब कह रहे हैं कि ये वक्त कितना बेरहम है। जिन लोगों के हाथों में इतना हुनर था कि उन्हें कीमती मोती पिरोने चाहिए थे, आज वही हाथ दुख के मारे अपने ही दांतों के नीचे दबे हैं। यह उस इंसान की कहानी है जिसके पास काबिलियत तो बहुत थी, लेकिन हालात ने उसे सिर्फ बेचैनी और गम ही दिया। जब हम किसी बहुत टैलेंटेड इंसान को बर्बाद होते देखते हैं, तो वही एहसास यहाँ ग़ालिब बयां कर रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे किसी महान संगीतकार के हाथ कांपने लगें और वह अपनी धुन न बजा पाए। या जैसे कहा जाता है कि दुनिया की सबसे दुखद चीज़ ज़ाया हुआ हुनर है। कभी-कभी जो हाथ सपने सजाने के लिए बने थे, वे सिर्फ दुख समेटने के काम आते हैं।
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