बस-कि हैं हम इक बहार-ए-नाज़ के मारे हुए
जल्वा-ए-गुल के सिवा गर्द अपने मदफ़न में नहीं
“So smitten are we by one spring of captivating grace,No dust in our grave, save for the flower's bright trace.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
क्योंकि हम एक नाज़ की बहार के मारे हुए हैं, हमारी कब्र में फूल के दर्शन के सिवा कोई धूल नहीं है। हमारा मदफ़न भी सौंदर्य से भरा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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