क़त्ल का मेरे किया है अहद तो बारे वाए अगर अहद उस्तुवार नहीं है

“At last the vow to slay me has been made; alas for me, if that promise does not hold firm!”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

आखिरकार उसने मुझे कत्ल करने का वादा तो किया है, लेकिन हाय अफ़सोस अगर यह वादा पक्का और अटल न रहा।

विस्तार

इस शेर में इश्क़ का एक बहुत ही दिलचस्प और तल्ख़ विरोधाभास छुपा है। आशिक़ इस बात से राहत महसूस कर रहा है कि महबूब ने आखिरकार उस पर ध्यान तो दिया, भले ही वह उसे क़त्ल करने का वादा ही क्यों न हो। शायरी की रिवायत में महबूब के हाथों जान जाना जुदाई की तड़प से कहीं बेहतर और मुकम्मल माना जाता है। अब आशिक़ का इकलौता ख़ौफ़ मौत नहीं, बल्कि यह है कि कहीं उसका बेपरवाह महबूब अपनी आदत के मुताबिक़ इस वादे से भी न मुकर जाए।

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