देते हैं जन्नत हयात-ए-दहर के बदले नश्शा ब-अंदाज़ा-ए-ख़ुमार नहीं है

“They offer Paradise in exchange for this mortal life; yet the wine's intoxication is scarcely equal to the hangover endured.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

वे इस सांसारिक जीवन के बदले जन्नत देते हैं, लेकिन मिलने वाला नशा उस ख़ुमार और कष्ट के अनुपात में नहीं है।

विस्तार

ग़ालिब यहाँ बड़े चुटीले अंदाज़ में ज़िंदगी की तकलीफ़ों और जन्नत के वादे की तुलना कर रहे हैं। वे इस दुनिया के रंज-ओ-ग़म को एक भारी ख़मार (हैंगओवर) की तरह देखते हैं और मिलने वाली जन्नत को उस नशे की तरह जिसका मज़ा ज़रा फीका पड़ गया हो। उनका कहना है कि इंसान ने ज़िंदा रहने की जो भारी क़ीमत और दुख झेला है, उसके आगे जन्नत का यह इनाम कुछ कमतर और नाकाफ़ी सा लगता है।

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