निकहत-ए-ज़ुल्फ़-ए-परीशां, दास्तान-ए-शाम-ए-ग़म
सुबह होने तक इसी अंदाज़ की बातें करो
“The braiding of your tresses, the tale of the sorrowful evening, Keep speaking of such things until the morning.”
— फ़िराक़ गोरखपुरी
अर्थ
परीशां ज़ुल्फ़ की सजावट और गम की शाम की कहानी, सुबह होने तक इसी अंदाज़ की बातें करते रहो।
विस्तार
यह शेर एक बेहद रूमानी और नशीले एहसास को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महफ़िल में एक ख़ूबसूरत, उदास शाम है, और इस शाम को बातों की मदहोशी से भर देना है। यह एक ऐसी चाहत है कि ये पल, ये बातें, बस सुबह होने तक ऐसे ही जारी रहें, जैसे किसी की ज़ुल्फ़ों की ख़ुशबू से नशा होता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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