तेरी निगाह से बचने में उम्र गुजरी है
उतर गया रग-ए- जां में ये नश्तर फिर भी
“A lifetime has passed avoiding your gaze, Yet this antidote has seeped into my lifeblood once more.”
— फ़िराक़ गोरखपुरी
अर्थ
तेरी निगाह से बचते-बचते जीवन बीता है, फिर भी यह नश्तर मेरी रग-ए-जां में उतर गया।
विस्तार
यह शेर एक ऐसे दर्द भरे इकरार को बयां करता है, जब बचने की हर कोशिश नाकाम हो जाती है। फ़िराक़ गोरखपुरी कहते हैं कि मैंने अपनी पूरी उम्र तेरी निगाह से दूर रहने में गुज़ार दी, फिर भी यह नश्तर... यह मेरे रग-ए-जां में उतर गया। यह उस नियति की बात है, जिसे हम अपनी मर्ज़ी से नहीं बदल सकते।
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