तमाम शोला-ए-गुल है तमाम मौज-ए-बहार
कि ता-हद-ए-निगाह-ए-शौक़ लहलहाते हैं बाग़
“All are the pyres of roses, all are the waves of spring, That in the limit of a longing gaze, the garden sways.”
— फ़िराक़ गोरखपुरी
अर्थ
ये सब गुलाबों की लपटें हैं और ये सब बसंत की लहरें हैं, कि चाहत की एक झलक में बाग़ महक उठता है।
विस्तार
इस खूबसूरत शेर में, फ़िराक़ गोरखपुरी कहते हैं कि गुलशन का हर शोला, बहार की हर लहर, सब एक नज़र के जादू में समाए हुए हैं। शौक़ की निगाह इतनी गहरी और प्रभावशाली है कि वह पूरे बाग़ को खिला देती है। यह एहसास बताता है कि हमारी तीव्र भावना में इतनी शक्ति होती है कि वह हर जगह सुंदरता को जन्म दे सकती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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