यह नर्म नर्म हवा झिलमिला रहे हैं चिराग़
तेरे ख़्याल की खुश्बू से बस रहे हैं दिमाग़
“This soft, soft breeze, the lamps are shimmering, My mind is dwelling only on the fragrance of your memory.”
— फ़िराक़ गोरखपुरी
अर्थ
यह कोमल हवा झिलमिलाते दीयों की तरह है, और मेरा मन तुम्हारे विचारों की सुगंध में खोया रहता है।
विस्तार
इस अशआर में, फ़िराक़ गोरखपुरी ने यादों के मादक प्रभाव को दर्शाया है। शायर कहते हैं कि हवा इतनी नर्म है कि दीप भी झिलमिला रहे हैं, लेकिन इस झिलमिलाहट का कारण कहीं और है। यह दिल की वो हालत है, जब किसी के ख़्याल की ख़ुशबू इतनी महकती है कि वह मन को पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लेती है। यह प्रेम की गहराई का एहसास है।
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