આજ અહીંથી તું સાંચર ઉતાવળો; ભાળી આવ એની કેવી રીતભાત, ચતુર ચીંતારા તને વિનવું;

“From here today, go forth with hasty stride;Observe her ways, and let me be apprised.Her manners, customs—clever painter, hear,I humbly beg you, make her nature clear.”

— दलपतराम
अर्थ

हे चतुर चित्रकार, मैं आपसे विनती करता हूँ कि आज यहाँ से आप शीघ्रता से जाएँ और उसके हाव-भाव तथा तौर-तरीकों का निरीक्षण करके वापस आएं।

विस्तार

यह खूबसूरत दोहा एक प्रेमी की दिल से निकली प्रार्थना है। वे अपने किसी चतुर और समझदार मित्र, शायद एक कलाकार या भरोसेमंद संदेशवाहक से उत्सुकता से कह रहे हैं कि वे तुरंत जाएं और किसी खास व्यक्ति को देखें। प्रेमी यह जानना चाहता है कि प्रियजन का व्यवहार कैसा है, उनकी आदतें कैसी हैं और वे खुद को कैसे प्रस्तुत करते हैं। यह गहरी भावना और अपने प्रिय के बारे में हर छोटी-बड़ी बात समझने की लालसा से जन्मी एक प्यारी गुजारिश है। शब्दों में छिपा आग्रह दिखाता है कि ये अवलोकन प्रेमी के लिए कितने मायने रखते हैं। वे अपने प्रिय के सार की एक विस्तृत और जीवंत तस्वीर देने वाली रिपोर्ट की उम्मीद कर रहे हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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