“Then, twisting and turning her body, she performs many somersaults; the dancer dances. But one thing from her person, never ever slips away; the dancer dances.”
एक नृत्यांगना अपने शरीर को मोड़ती और घुमाती है, बहुत सारे कलाबाज़ियां करती है, लेकिन उसके शरीर से एक भी वस्तु कभी दूर नहीं होती।
यह दोहा एक नटनी के अद्भुत कौशल का वर्णन करता है। कल्पना कीजिए कि वह कैसे अपने शरीर को उलट-पलट करती है, कई गुलांटें खाती है और अद्भुत करतब दिखाती है। वह अपने शरीर को हर संभव तरीके से घुमाती है, अपनी कला का प्रदर्शन करती है। लेकिन, इन सभी जटिल और गतिशील हरकतों के बावजूद, उसके शरीर से एक भी चीज़ ज़रा भी खिसकती नहीं है, बल्कि अपनी जगह पर टिकी रहती है। यह उसकी पूर्ण महारत और एकाग्रता को दर्शाता है, कि शानदार प्रदर्शन के बावजूद कुछ भी आवश्यक न तो गिरता है और न ही अपनी जगह से हटता है। यह निरंतर गति के बीच उसके अटूट संतुलन और फोकस का प्रमाण है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
