એ કૌતક દેખી કોઈને, મન સમજાય ન મર્મ; નટડી નાચે છે. પણ મોણવેલ, મુજને મળી, ભાગ્યો તેથી ભર્મ, નટડી નાચે છે.

“Seeing this wonder, none grasp its secret, the dancer dances.But Monvel, I found, shattered my delusion, the dancer dances.”

— दलपतराम
अर्थ

इस कौतुक को देखकर कोई भी इसका मर्म नहीं समझ पाता; नटनी नाच रही है। परंतु मुझे मोणवेल मिला, जिससे मेरा भ्रम टूट गया।

विस्तार

यह दोहा दुनिया के मोहक, फिर भी भ्रामक तमाशे के बारे में बात करता है, ठीक वैसे ही जैसे एक नर्तकी का प्रदर्शन मन को मोह लेता है पर उसके गहरे अर्थ को छिपा लेता है। जब हम इस शानदार प्रदर्शन को देखते हैं, तो हमारा मन अक्सर इसके वास्तविक सार को समझने में संघर्ष करता है, जिससे हम आश्चर्य और भ्रम में रह जाते हैं। हालाँकि, कवि को "मोनवेल" के माध्यम से स्पष्टता मिलती है। यह "मोनवेल" एक गहरी अंतर्दृष्टि या एक मार्गदर्शक उपस्थिति का प्रतिनिधित्व करता है जिसने कवि को भ्रम से मुक्त होने और इस सांसारिक नृत्य की सच्ची प्रकृति को समझने में मदद की। यह सतह से परे देखने और उस अंतर्निहित सत्य को जानने के बारे में है जो ज्ञान के मार्गदर्शन में स्वयं को प्रकट करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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