“Animate forms were painted, of beast, bird, and mankind. O Lord...Like mere bowls of water, countless oceans you find.”
पशु, पक्षी और मनुष्यों के सजीव चित्र बनाए गए। हे प्रभु, तुम्हारे लिए अनगिनत सागर भी पानी के कटोरे जैसे हैं।
यह सुंदर दोहा गुजराती भाषा से है और सृष्टि के अद्भुत चमत्कार के बारे में बताता है। यह कहता है कि सभी सजीव प्राणी – पशु, पक्षी, नर और नारी – जीवंत, चेतन चित्रों के समान हैं। प्रत्येक एक अद्वितीय कृति है, जो जीवन और चेतना से भरी हुई है। फिर, यह हमारे दृष्टिकोण को व्यापक करता है, यह सुझाव देता है कि सबसे विशाल महासागर भी, जो हमें असीम लगते हैं, वास्तव में अनेक छोटे पानी के कटोरे के समान हैं। यह हमें ब्रह्मांड के अविश्वसनीय पैमाने और उस सत्ता की असीमित शक्ति की याद दिलाता है जिसने इस समस्त जीवन और हमारे चारों ओर की विशालता का सृजन किया है। यह जीवंत संसार और अनंत से परे की चीजों पर आश्चर्य करने का एक आह्वान है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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