સદગુણ ચુંદડીના સર્વથા, જીભે ઉચર્યા ન જાય; લખતાં પણ ન લખાય, ઓઢી ચળકતી ચુંદડી.

“The chunari's virtues, in their full array,Cannot be spoken by the tongue, come what may;Nor can they be penned, for all to see,When one wears the chunari, shining radiantly.”

— दलपतराम
अर्थ

चुनरी के संपूर्ण गुणों को जुबान से व्यक्त नहीं किया जा सकता, न ही उन्हें लिखा जा सकता है, जब कोई चमकती हुई चुनरी धारण करता है।

विस्तार

यह सुंदर दोहा हमें सिखाता है कि सच्चे सद्गुण बहुत गहरे और महत्वपूर्ण होते हैं, बिल्कुल एक चमकती हुई, शानदार ओढ़नी की तरह। वे इतने विशाल और तेजस्वी होते हैं कि उन्हें केवल शब्दों से पूरी तरह बयान नहीं किया जा सकता, चाहे आप उन्हें बोलने की कोशिश करें या लिखने की। उनकी असली सुंदरता और सार व्याख्याओं या वर्णनों में नहीं मिलता। इसके बजाय, इन अच्छे गुणों की भव्यता को वास्तव में समझने और सराहने के लिए, आपको उन्हें अपने जीवन में जीना होगा, उन्हें अपने कार्यों और चरित्र में उतारना होगा। इस 'सद्गुणों की ओढ़नी' को स्वयं धारण करके ही आप इसकी वास्तविक चमक और आभा का अनुभव कर सकते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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