રંગરસ પામિયે પ્રભુને પ્રતાપેરે, રંગરસ ઇશ્વર રીઝીને આપેરે; રંગરસ સસારમાં છે સારરે, રંગરસસૃષ્ટિતણો શણગારરે.

“The essence of joy, by God's grace we gain,This joyous essence, God gives when He's pleased again;The essence of joy, the world's very core,The adornment of creation, forevermore.”

— दलपतराम
अर्थ

आनंद का सार हमें प्रभु की कृपा से प्राप्त होता है, ईश्वर प्रसन्न होकर इसे प्रदान करते हैं। यह आनंद संसार का सार है और सृष्टि का श्रृंगार है।

विस्तार

यह सुंदर दोहा हमें सिखाता है कि जीवन का असली आनंद और जीवंत सार, जिसे 'रंगरस' कहा गया है, हमें ईश्वर की कृपा से ही प्राप्त होता है। यह एक दिव्य उपहार है, जो परमात्मा हमें प्रसन्न होकर प्रदान करते हैं। यह 'रंगरस' सिर्फ जीवन का एक हिस्सा नहीं है; बल्कि यह हमारे सांसारिक अस्तित्व का मूल आधार और अर्थ है। इसके अलावा, इसे सृष्टि का सुंदर आभूषण, वह सौंदर्य बताया गया है जो संपूर्ण ब्रह्मांड को सजाता और सुशोभित करता है। संक्षेप में, जीवन में हम जो भी रंग, खुशी और सौंदर्य अनुभव करते हैं, वह सब ईश्वर का सीधा आशीर्वाद है।

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