સજ્જનને મન શુદ્ધ છે, પણ વિશ્વ વિરુદ્ધ વિચાર; બહુજનમાં નહિ બોલીએ, જેથી ઉપજે ઉપાધી અપાર. સજ્જનo

“The noble mind is pure, though its thoughts the world defy; Speak not among the masses, lest countless troubles multiply.”

— दलपतराम
अर्थ

सज्जन का मन शुद्ध होता है, परन्तु उनके विचार दुनिया के विचारों के विरुद्ध हो सकते हैं। ऐसे विचारों को आम लोगों के बीच नहीं बोलना चाहिए, जिससे अपार कष्ट उत्पन्न हो सकते हैं।

विस्तार

यह दोहा हमें दुनिया में कैसे व्यवहार करना चाहिए, इस बारे में एक सुंदर सीख देता है। यह कहता है कि एक भले और नेक व्यक्ति के विचार भले ही शुद्ध और अनूठे हों, और शायद दुनियावी सोच से थोड़े अलग भी हों, फिर भी उन्हें हर जगह और हर किसी के सामने व्यक्त नहीं करना चाहिए। भीड़ या जनसमूह में ऐसे अलग विचार बताने से कई बार गलतफहमी या बेवजह की मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। इसलिए, भले ही आपके इरादे नेक हों, समझदार व्यक्ति अपनी बातों को सोच-समझकर और सही समय पर कहता है, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

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