ग़ैर को मुँह लगा के देख लिया झूट सच आज़मा के देख लिया

“I gave favor to the rival and saw what came to pass; every truth and falsehood I have put to the test at last.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

मैंने ग़ैर (अजनबी या प्रतिद्वंद्वी) को अहमियत देकर उसका अंजाम देख लिया है, और सच व झूठ को अच्छी तरह परख कर आज़मा लिया है।

विस्तार

इस शेर में एक गहरी उदासी और दुनिया के कड़वे तजुर्बे की झलक है। शायर कहता है कि उसने आज़माने की ख़ातिर या अपनों से मायूस होकर ग़ैरों को भी तवज्जो देकर देख ली, लेकिन नतीजा सिवाय धोखे के कुछ न निकला। तमाम सच और झूठ की परख करने के बाद दिल अब एक ऐसी बेज़ारी से भर गया है, जहाँ तजुर्बा तो मिला मगर सुकून छिन गया।

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