भवें तनती हैं ख़ंजर हाथ में है तन के बैठे हैं किसी से आज बिगड़ी है कि वो यूँ बन के बैठे हैं

“Brows tightly knit, a dagger in hand, they sit upright and proud; with whom did they fall out today, that they sit so haughtily adorned?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

उनकी भौंहें तनी हुई हैं, हाथ में खंजर है और वे तनकर बैठे हैं। लगता है आज किसी से उनकी अनबन हो गई है कि वे इस तरह सज-धज कर और तेवर दिखाकर बैठे हैं।

विस्तार

इस शेर में माशूक़ के नख़रे और उसके तेवरों का बड़ा ही दिलकश नज़ारा पेश किया गया है। भवों पर बल, हाथ में ख़ंजर और सीना ताने बैठना—शायर मुस्कुराते हुए पूछता है कि आज किससे अनबन हुई है जो आप इस क़दर सज-धज कर और ऐंठ में बैठे हैं। यहाँ 'बिगड़ने' और 'बनने' का ख़ूबसूरत विरोधाभास यह दिखाता है कि महबूब का ग़ुस्सा भी उसके हुस्न और अदा को और निखार रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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