ऐ 'दाग़' दिल ही दिल में घुले ज़ब्त-ए-इश्क़ से अफ़्सोस शौक़-ए-नाला-ओ-फ़रियाद रह गया

“O Dagh, restrained by love, the heart dissolved within in pain; alas, the yearning to weep and wail unvoiced did still remain.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

ऐ दाग़, इश्क़ के दर्द को दबाए रखने की वजह से दिल अंदर ही अंदर घुटकर पिघल गया, और अफ़सोस कि रोने और फ़रियाद करने की हसरत अधूरी ही रह गई।

विस्तार

दाग़ साहब यहाँ इश्क़ के उस दर्दनाक पहलू को छूते हैं जहाँ इंसान दुनिया के सामने अपनी गरिमा बनाए रखने के लिए सारा दर्द चुपचाप पी जाता है। प्यार में ख़ुद पर इतना ज़ब्त रखा कि दिल अंदर ही अंदर घुटकर राख हो गया, मगर कभी खुलकर चीखने या रोने का सहारा भी न लिया। अफ़सोस बस इसी बात का रह गया कि दिल तो तबाह हो गया, लेकिन अपने दर्द को ज़ुबान देने और खुलकर रो लेने की जो तड़प थी, वो सीने में ही दबी रह गई।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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