“Good or bad, all found a haven in your heart; ruined and homeless, I alone was left undone.”
तुम्हारे दिल में अच्छे और बुरे हर तरह के लोगों के लिए जगह है, मगर सिर्फ़ मैं ही बेघर और बर्बाद रह गया।
इस शेर में शायर का एक बेहद गहरा और मासूम शिकवा छिपा है। महबूब का दिल इतना बड़ा है कि उसमें भले-बुरे हर तरह के लोगों को पनाह मिल जाती है, मगर जिसने अपनी पूरी दुनिया उसी के नाम कर दी, वही बेघर और बेसहारा रह गया। 'ख़ानुमाँ-ख़राब' यानी सब कुछ लुटा देने वाला आशिक़ अपनी इसी बदकिस्मती पर तड़प उठता है कि सबके लिए जगह होने के बावजूद केवल वही तन्हा और बर्बाद छूटा।
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