सब मिटा दें दिल से हैं जितनी कि उस में ख़्वाहिशें गर हमें मालूम हो कुछ उस की ख़्वाहिश और है

“We would erase every desire that dwells within the heart / If only we knew that their desire was something else.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

अगर हमें यह पता चल जाए कि महबूब की ख़्वाहिश कुछ और है, तो हम अपने दिल में मौजूद सारी ख़्वाहिशें मिटा देंगे।

विस्तार

इस शेर में इश्क़ के उस मुक़ाम का ज़िक्र है जहाँ इंसान अपनी हर आरज़ू को मिटाने के लिए तैयार हो जाता है। शायर कहता है कि अगर उसे बस इतना पता चल जाए कि महबूब की मर्ज़ी क्या है, तो वह दिल में पल रही अपनी तमाम ख्वाहिशों को एक पल में कुर्बान कर देगा। यहाँ समर्पण की गहराई इतनी खूबसूरत है कि अपनी खुशी से बढ़कर सिर्फ़ महबूब की रज़ा मायने रखती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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