“With that master of excuses, keeping faith could not be won; from my side, what was left unoffered? Yet from that side, nothing was done.”
उस बहानेबाज़ के साथ बात का निबाह मुमकिन न हो सका; मेरी तरफ़ से क्या कुछ नहीं किया गया, मगर उसकी तरफ़ से कुछ भी नहीं हुआ।
यह शेर एकतरफ़ा मोहब्बत के उस गहरे दर्द को बयां करता है जहाँ एक इंसान रिश्ते को निभाने के लिए सब कुछ न्योछावर कर देता है, मगर दूसरा सिर्फ़ बहाने बनाता रहता है। शायर कहता है कि मेरी तरफ़ से तो वफ़ा और जतन की कोई कमी नहीं रही, लेकिन उधर से ज़रा-सा भी अपनापन नहीं मिला। जब किसी रिश्ते में सारी कोशिशें सिर्फ़ एक तरफ़ से होने लगें, तो दिल का टूटना और थक जाना तय है।
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