जिगर के टुकड़े हुए जल के दिल कबाब हुआ ये इश्क़ जान को मेरे कोई अज़ाब हुआ

“The liver was torn to shreds, the heart burnt to a cinder; this love has become a torment upon my very soul.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

जिगर टुकड़े-टुकड़े हो गया और दिल जलकर कबाब बन गया, यह इश्क़ मेरी जान के लिए एक अज़ाब बन गया है।

विस्तार

इस शेर में शायर ने इश्क़ के दर्द को बहुत ही तीखी और क्लासिकल उपमाओं के ज़रिए बयां किया है, जहाँ दिल आग में कबाब की तरह भुन गया है और जिगर के टुकड़े-टुकड़े हो चुके हैं। वे महसूस करते हैं कि जिस मोहब्बत से सुकून की उम्मीद थी, वह दरअसल जान पर आ बनी कोई भारी आफ़त या अज़ाब बन गई है। यह शेर प्यार की उस इंतिहा की दास्तान है जहाँ चाहत केवल जज़्बात नहीं रहती, बल्कि पूरे वजूद को झुलसा देने वाली तपिश बन जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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