रुस्वा-ए-जहाँ करता है रो रो के हमें तू हम तुझे कुछ ऐ दीदा-ए-नम कह नहीं सकते

“You bring us disgrace before the whole world by weeping incessantly; yet, O tearful eyes, we cannot bring ourselves to reproach you.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

ऐ भीगी आँखों, तू लगातार रो-रोकर हमें पूरी दुनिया में बदनाम कर रही है, फिर भी हम तुझसे कुछ कह नहीं सकते।

विस्तार

इस शेर में शायर अपनी ही भीगी आँखों से एक मासूम शिकवा भी करता है और उनसे बेपनाह हमदर्दी भी जताता है। वह कहता है कि ये आँसू सरेआम बहकर उसके दिल के छुपे दर्द को दुनिया के सामने तमाशा बना रहे हैं। मगर इस ज़िल्लत के बावजूद वह अपनी आँखों को डांट नहीं पाता, क्योंकि वह जानता है कि आँखें तो बस उसी के टूटे दिल का बोझ बाँट रही हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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