क्या छोड़ें असीरान-ए-मोहब्बत को वो जिस ने सदक़े में न इक मुर्ग़-ए-गिरफ़्तार भी छोड़ा

“How would she ever free the captives of love, she who did not release even a single caged bird in charity?”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

वह भला मोहब्बत के कैदियों को क्या आज़ाद करेगी, जिसने सदक़े (बला टालने) के तौर पर भी किसी एक क़ैद परिंदे को रिहा नहीं किया।

विस्तार

इस शेर में शायर माशूक़ की बेरुख़ी और बेरहमी को बड़ी नफ़ासत से बयां कर रहा है। रिवायत है कि बलाएं टालने या सदक़े के तौर पर पिंजरे में क़ैद परिंदे को आज़ाद किया जाता है, लेकिन महबूब ने तो सवाब के लिए भी कभी एक परिंदा आज़ाद नहीं किया। जब उसका दिल एक बेज़बान परिंदे पर भी नहीं पिघलता, तो फिर प्यार की क़ैद में तड़प रहे आशिक़ों की रिहाई की उम्मीद भला कैसे की जा सकती है?

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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