ज़िन्दगी की या जाँफ़िशानी की, हो जो राह जोखिम भरी, वो गज़ल।

“Whether of life or of self-sacrifice, the path that is perilous, that is Ghazal.”

— अमृत घायल
अर्थ

ग़ज़ल वह ख़तरनाक रास्ता है, चाहे वह जीवन का हो या आत्म-बलिदान का।

विस्तार

यह शेर, अम्रुत घायल साहब का, जीवन के सार पर एक गहरा विचार है। शायर कह रहे हैं कि जीवन अपने आप में एक गज़ल है। लेकिन यह गज़ल कहाँ से बनती है? यह बनती है उस राह से जो जोखिम भरी हो। यानी, जब ज़िन्दगी हमें चुनौती देती है, जब हमें अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है, तो वह संघर्ष ही हमारी सबसे बड़ी कविता बन जाता है। यह एक बहुत ही गहरा फ़लसफ़ा है।

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