नहीं अंधेर आज़ादी में भी कम है ग़ुलामी से,कि वीरान शाम की भाँति सवेरे वैर साधा है।
“There's no less darkness in freedom than in slavery,For like a desolate evening, morning has sought its revenge.”
— अमृत घायल
अर्थ
आज़ादी में भी गुलामी से कम अंधेर नहीं है। सुबह ने तो जैसे वीरान शाम की तरह बदला लिया है, जिसका अर्थ है कि यह नई स्वतंत्रता भी उतनी ही समस्याग्रस्त है।
विस्तार
देखिए, यह शेर आज़ादी और ग़ुलामी के बीच के गहरे फ़र्क़ को समझाता है। शायर कह रहे हैं कि आज़ादी का अँधेरा, ग़ुलामी के अँधेरे से कम नहीं है। क्योंकि जब सुबह आती है, तो वो बस एक साधारण सुबह नहीं होती... बल्कि वो एक बदला लेती हुई सुबह होती है, जो वीरान शाम की तरह ही तन्हा और दर्दनाक होती है।
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