टपके है लहू आँख से पानी के स्वांग में! काव्य मिल रहे हैं कहानी के स्वांग में!
“From eyes, blood drips in watery disguise, Poems emerge, in stories' guise.”
— अमृत घायल
अर्थ
आँखों से खून पानी के रूप में टपक रहा है। कविताएँ कहानियों के रूप में मिल रही हैं।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ कविता की बात नहीं करता, बल्कि भावनाओं के दिखावे की बात करता है। शायर कहते हैं कि आँख से जो टपकता हुआ लहू है, वो पानी का स्वांग है। यानी, हमारा दर्द, हमारा जज़्बा, अक्सर दिखावा होता है। और जब आप कोई कहानी पढ़ते हैं, तो उसमें भी जो कविता मिलती है, वो भी एक तरह का स्वांग है। यह हमें सच्चाई देखने को कहता है।
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