जो हो श्रद्धा मुसाफ़िर को पूर्ण मंज़िल में, तो आप ही मुड़ते हैं क़दम मकाम की तरफ़।

“If the traveler has complete faith in their destination, Their steps automatically turn towards the abode.”

— अमृत घायल
अर्थ

यदि यात्री को अपनी मंज़िल पर पूर्ण विश्वास हो, तो उसके कदम अपने आप ही ठिकाने की ओर मुड़ जाते हैं।

विस्तार

ये शेर हमें विश्वास और कर्म के गहरे रिश्ते के बारे में बताता है। शायर कह रहे हैं कि अगर आपके अंदर अपनी मंज़िल पर अटूट श्रद्धा है, तो आपको कहीं से कोई रास्ता नहीं मिलेगा। आप ख़ुद ही अपने क़दमों को उस मक़ाम की ओर मोड़ लेंगे। यह सिर्फ़ एक लाइन नहीं, बल्कि जीवन का वह नियम है कि जब इरादा पक्का होता है, तो रास्ता ख़ुद-ब-ख़ुद मिल जाता है।

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